उडान अभी बाकी है”

फतेह करना है चांद को
पर बाधना सामान अभी बाकी है
कश्मीर से कन्याकुमारी तक लहराना है परछम
दिल मे वो अरमान अभी बाकी है

सभी तो पीछे धकेलना चाहते है
पर जो साथ दे मिलना वो इन्सान अभी बाकी है
कबतक औरों के लिए भाग दौड़
भरनी अपने लिए वो उडान अभी बाकी है

कौन देख पाया है सपनों को उडते हुए
दिखाने को सपनों मे वो जान अभी बाकी है
सिर झूकाना नही सिर उठाकर चलने का वक्त आ गया है
बस उठना जगना और भागना अभी बाकी है

लक्ष्य सामने है
मजिल पर बढ़ना अभी बाकी है
किस्मत से लड़कर दुनिया बदल दे
देना वो इम्तिहान अभी बाकी है

हार न माने मुश्किलों मे
क्योंकि हम मे वो जान अभी बाकी है
किस्मत भी कब तक हमें आजमाएगी
हम से लड़कर वो भी एक दिन थक जाएगी
हौसलौं मे लग चुके है उडान के पंख
आना अन्जाम अभी बाकी है

अभी तो नापी है मुट्ठीभर जमीन
छुने को नीला आसमान अभी बाकी है
अभी तो बदली है सोच हमने
बदलना कारवां अभी बाकी है

जहाँ हो सिर्फ खुशी और खुशहाली
बनाना वो जहान अभी बाकी हैं
देश को बदलने का सपना अभी हमने देखा है
देखने के लिए पूरा हिदुस्तान अभी बाकी है

 

रेणुका चौहान


4 Comments

Ajay Jamta · March 13, 2018 at 11:16 pm

Udaan abhi baaki h awesome words used by you in this poem??? congratulation and keep it up dear

Anonymous · November 1, 2017 at 9:49 pm

its realy osm. …. i lv it😍😍

raman rb · November 1, 2017 at 9:47 pm

waooo osm poem …. i like it😍😍

Anonymous · October 29, 2017 at 4:01 pm

बहुत बढि़या जी

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