“कुछ कर दिखाना है”

वो सागर भी क्या सागर
जिसका कोई साहिल नहीं
वो राहें भी क्या राहें
जिनकी कोई मंजिल नहीं
हासिल करना है तो उसे कर जो किस्मत मे नहीं
ए- मेहरबाँ
वो जिदंगी भी क्या जिदंगी
जिसमें कोई संघर्ष नहीं

जीवन एक बार मिलता है
इन्सान को भी जानवर को भी
फर्क बस इतना सा है
कि
वो सासें लेते है
और हम जिदंगी जीते है

हीरे और नगीने मे फर्क होता है
खुन और पसीने मे भी फर्क होता है
कुछ दुनिया से हटकर करके दिखाना है दोस्तों
क्योंकि सांस लेने
और जिदंगी जीने मे बहुत फर्क होता है

उठते है जो वीर जवान
कायनात से लड़कर जीतते है
वरना वो जीत भी क्या जीत
जिसमें कुछ कर गुजरने की चाह नहीं

लोग कहते है कि जन्नत मृत्यु पश्चात नसीब होती है
मै कहती हुँ
संघर्ष के अलावा कही और मजा नहीं
रोटी अपनी मेहनत की कमाई की
और जंग के बाद की जीत
या किसान बयां कर पाए
या सरहद पर डटा सिपाही
मृत्यु की जन्नत काल्पनिक है
नसीब मे होगी या नहीं
असल जन्नत तो जीवन है
मकसद को पूरा करे बिना कोई स्वर्ग नसीब नहीं

जिदंगी तो बस वही है
कि
जो सोचा है वो कर दिखाना है
उसके लिए सब से लड़ जाना है
हम सही है तो क्यौं
फिकर करे किसी की
जब है ठान लिया
कि अब तो कुछ कर दिखाना है

होगी शिद्द्त हमारे जज्बातों मे
तो हमारी मेहनत भी रंग लाएगी
वरना वो शिद्दत भी क्या शिद्दत
जिसमें सहनशीलता का भाव नहीं
जीवन को जीना है तो मुस्कुरा कर जीयो
वरना वो जीना भी क्या जीना
जिसमें खुशी का भाव नहीं

” तुफान मे ताश का घर नहीं बनता
रोने से बिगड़ा मुकद्दर नहीं बनता
जिदंगी को जीतने का हौंसला रखो
क्योंकि एक हार से कोई फकीर और एक जीत से कोई सिकंदर नही बनता”

 

रेणुका चौहान


2 Comments

Anonymous · November 3, 2017 at 3:25 pm

good

Nisha · November 2, 2017 at 5:00 pm

well done keep it up

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