मन की बात ये मन ही जाने 

एक बार की बात है डा. अब्दुल कलाम  और उनके एक चचेरे भाई समुद्र किनारे एक बड़े से पेड़ पर चढ़ गये। उस समय उन दोनों के पिता भी वहीं टहल रहे थे।  कुछ देर बाद अचानक तेज हवा बहने लगी और उसकी तीव्रता वक़्त के साथ बढ़ने लगी।

खुशियों की दुकान

ये बात मई 2015 की है, मुझे एक कंपनी  में सेल्स प्रतिनिधियों (sales) के  50 लोगों के समूह को एक दिन की कार्यशाला  के लिए बुलाया गया। मुझे उस दिन का एक ख़ास पल मुझे आज भी याद है वो इसलिए नही कि उस दिन मेरे द्वारा पूछे गये एक Read more…

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