यह बात 2015 पदम श्री पुरुस्कार वितरण समारोह की है। इस समारोह मे अनेकों ही महान लोगों को पुरिस्कृत किया गया। इन मे से Bollywood के महानायक श्री अमिताभ बच्चन भी थे। पुरुस्कार लेने वाले ज्यादातर लोगों को दुनिया पहले से ही जानती थी मगर उन सभी लोगों में से एक नाम ऐसा भी था जिसका नाम उस दिन सभी मौजूद लोगों के लिए सबसे अलग मगर सबसे आश्चर्यजनक था।

यह नाम था जादव पायेंग! जिसे पूरा विश्व आज वनपुरुष के नाम से भी जानता है और आज वह पद्म श्री जादव पायेंग हैं। यह कहानी एह ऐसे महापुरुष की है जिसने बिलकुल ही निस्वार्थ भाव से अकेले ही लगभग 1400 एकड़ बंजर जमीं पर 30 वर्ष में घना जंगल बना दिया।

अपने निजी जीवन में कोई बड़ी उपलब्धि हासिल कर जाना बहूत बड़ी बात होती है मगर महान बात वो होती है जब कोई अपने निजी जीवन का मुनाफा या फायदा सोचे बिना ही कुछ ऐसा कर जाते हैं जो न सिर्फ इंसानी पीढ़ियों बल्कि जंगली जानवरों की सारी पीढ़ियों को भी एक जीवनदान देती है।

मुझे नहीं मालूम जादव जैसे महान और साधारण लोग इतना बड़ा दिल कहाँ से लाते हैं मगर इतना जरूर मालूम है कि ऐसे लोगों से ज्यादा खुश और संतुष्ट कोई दूसरा और नहीं हो सकता है।

संघर्षपूर्ण बचपन:

एक बार कि बात है कि असम में 1965 में ब्रह्मपुत्र नदी में आई बाढ़ में नदी किनारे बसे एक गाँव, अरुणा सपोरी का एक बड़ा हिस्सा नदी में बह गया। जिस कारण माता-पिता को अपने 13 बचों, जानवरों और साजो-सामान के साथ 13 km दूर दुसरे गाँव माजुली पलायन करना पड़ गया।

इस पलायन के साथ ही अत्यंत गरीबी की मार झेल रहे माता पिता ने अपने 13 बचों में से 5 वर्ष के जादव को अपने दोस्त अनिल बोख्ताकुर के पास छोड़ दिया। जादव ने अपनी 10स्वीं तक की पढाई अनिल की देखरेख में पूरी की। उसने जोरहाट के एक स्कूल से दसवीं कक्षा की परीक्षा दी और फिर हमेशा के लिए अपने मृत माता पिता द्वारा पीछे छोड़े पशुओं और छोटे भाई बहनों को सँभालने अपने गाँव चल दिया।

जीवन बदलने वाली एक घटना:

1978 की एक जला देने वाली गर्मी में जब एक 15 वर्षीय किशोर दूर कसबे से वापिस अपने गाँव अरुणा सपोरी लौट आया। मगर गर्मी के उस दिन उस ने अपने गाँव लौटकर एक ऐसा मंजर देखा जो उसकी जिन्दगी को हमेशा के लिए बदल दिया।

लगभग 100 से ज्यादा सांप बेसुध एवं अधमरी अवस्था में एक दुसरे से लिपटे हुए गर्म और खुश्क रेत के टीले पर पड़े हुए थे। यह सब देख उस किशोर का दिल पिघल गया। इस दर्द से एक ऐसी चिंगारी का जन्म हुआ जो आज तक न सिर्फ जिन्दा है बल्कि पुरे विश्व में फ़ैल गयी है।

किशोर को गांववालों से मालुम हुआ कि नदी में आई एक बाड़ उन सर्पों को वहां लाया था और वो किसी भी तरह की छाया, पौधे और खाना न होने के कारण उसी जगह पर सुखकर मर रहे थे। कुछ बुजुर्गों ने बताया की सर्पों का मुख्य भोजन छोटे जीव और पंछियों के अंडे होता है। मगर वहां पर तो सिर्फ रेत ही रेत थी।

चूँकि वहां जंगल ही नही था इसलिए उनकी वो गत हो रही थी। कुछ लोगों ने उसे कहा कि ब्रह्मपुत्र में आने वाली बाढ़ और लगातार हो रही मृदा अपरदन (soil erosion) की वजह से जल्दी ही वो टापू भी बह जायेगा और उनके पास भी रहने की लिए घर नही रहेगा और इसी प्रकार वो भी एक दिन भूखे ही दम तोड़ देंगे।

50 बीज और 25 पौधे:

यह बात उस किशोर की आत्मा में घर कर गयी। उस किशोर ने कहा की मै ऐसा नही होने दूंगा और यहाँ इतने पेड़ उगाऊंगा कि कभी उन्हें घर छोड़ कर न जाना पड़े। उसकी बात सुनकर गावं वालों ने उसे 50 बीज और बांस के 25 छोटे पौधे दिए।

50 बीज और 25 पौधों को साथ लेकर जाधव जो उस दिन अपने लक्ष्य कि तरफ निकले और आज तक मुड़कर नहीं देखा। दूध बेचकर अपने छोटे भाई बहनों को पालने के साथ साथ हर रोज बंजर रेतीली जमीं पर वह बीजों को डुबोने, पौधों को रोपनें और सिंचाई करने का काम करता चला गए।

36 वर्ष, 1360 एकड़ बंजर जमीन और अकेला जादव:

1979 में जो सिलसिला जादव ने शुरू किया था वो आज भी चल रहा है। एक महान लक्ष्य और 30 वर्ष तक रोजाना की मेहनत ने जो काम कर दिखाया वो विश्वभर के लोगों के लिए असंभव को संभव करने जैसा चमत्कार है। लगभग 1400 एकड़ में आज एक सुन्दर विशाल वन फैला हुआ है जो तरह तरह के पेड़ पौधों से भरा हुआ है यही नहीं आज जंगल तरह तरह के वन्य जीवों का घर भी है।हाथियों, बाघों, हिरनों आदि के साथ- साथ अनेकों पक्षियों की प्रजातियाँ आज यहाँ पनप रही है।

पारिवारीक जीवन और बढ़ता संघर्ष:

अपने लक्ष्य के प्रति जादव इतना समपर्पित थे कि उन्होंने शादी न करने का मन बना लिया था। मगर गाँव के बुजुर्गों के कहने से आखिरकार वो शादी के लिए तैयार हो गए। 39 वर्ष की आयु में जादव ने 25 वर्षीय बिनीता से शादी की और वो दोनों आज एक बेटी और दो बेटों के माता पिता है।

बचों की पढाई की वजह से जादव को अपने गाँव से दूर जोरहाट पलायन करना पड़ा जो कि उनके गाव से दूर था। इस वजह से अब उन्हें और भी ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। अब दिन की शुरुआत सुबह 3 बजे करनी पड़ती है। घर का काम निपटाने के बाद एक घंटा साइकिल से सपोरी और फिर वहां से 5 km नाव में सफ़र करने के बाद फिर से 30 मिनट साइकिल चलने के बाद अपने मवेशियों के बाड़े पर पहुँचते है

फिर गायों का मल उठाकर खेतों में फैकना , घास काटने, गायों से दूध निकलने और फिर दूध को बेचने की लिए ले जाने के बाद 9 बजे तक अपना सुबह का नाश्ता कर पाते हैं। उसके बाद जाकर कहीं वो बाकी के पुरे समय में अपने जंगल की देख भाल के लिए निकलते हैं।

सरकारी अनदेखी:

इस पूरी कहानी में जादव बस एक ही बात से थोडा दुखी दीखते हैं। और वह बात है कि इन 36 वर्षों में सरकारी विभाग ने उनकी कोई भी मदद नहीं की है। न तो पैसों से और न ही कर्मचारयों के रूप में। यहाँ तक कि जब जब सरकारी विभाग को ये भी सूचित किया गया था कि Rhyno की एक विलुप्त प्रजाति भी यहाँ अब दिखती है तब भी उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया।

यह बात सरकार की समझ में तब आई जब शिकारिओं ने एक Rhyno का शिकार किया। जिस के बाद सरकार ने मुठी भर लोगों को तैनात किया मगर इतने विशाल जंगल की देखबाल करना इतने से लोगों की बस की बात नहीं है।

मुख्य उपलब्धियां:

हालाँकि पद्म श्री जादव के लिए कोई भी पुरूस्कार मायने नहीं रहते है। फिर भी उन्होंने पर सैकड़ों ही सामान हासिल किये हैं। वह अपने इस जंगल को ही अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हैं। उनका मानना है कि इससे बड़ा कोई पुरूस्कार नहीं हो सकता है। आज वह लगभग हर सप्ताह किसी न किसी तरह के सामान या conference का हिस्सा रहते हैं। उनके द्वारा अर्जित कुछ महत्वपूर्ण सम्मान कुछ इस प्रकार है:

  • जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी “Forest Man Of Year 2012” सम्मान
    2012 में राष्ट्रपति APJ Abdul Kalam द्वारा समानित
    फ्रांस में आयोजित 7th Global Conference में Expert की भूमिका अदा की
    Sanctuary Asia द्वारा Wildlife Service Award

जादव बहुत से फ़िल्म मेकर की documentaries के हीरो रहे है। उनके जीवन और उपलब्धियों पर केंद्रित अनेकों ही short film एवं documentaries बनाई गई हैं जिंनमे 2013 में निर्मित आरती श्रीवास्तव ‘Foresting Life तथा 2013 में ही निर्मित William Douglas McMaster की बहुचर्चित “Forest Man भी है। “Forest Man” को इस पोस्ट के अंत मे लिंक किया गया है।

इस खूबसूरत दिल वाले इंसान के जीवन को थोड़ा और करीब से जानने के लिए इसे जरूर देखें।

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Manoj Sharma

Writer, Trainer and Motivator

7 Comments

upendra kumar · November 2, 2017 at 6:17 am

very nix

Pankaj negi · October 27, 2017 at 6:02 pm

Awesome

Nisha Sharma · October 26, 2017 at 7:31 pm

Awesome , wonderful

rohit · October 25, 2017 at 11:14 am

सर बड़ा अच्छा लिखते हैं आप

Geeta · October 25, 2017 at 11:13 am

wonderful inspirational story

Rohan Srivastav · October 25, 2017 at 8:16 am

Hats off to this man. A great unsung story …

Anonymous · October 24, 2017 at 3:56 pm

Very lesson full, Very encouraging and teachings

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