एक बेहद खुबसूरत कहावत है “जो कुछ भी होता है वो अच्छे के लिए ही होता है”। मैं नही जानता कि ये कहावत किस ने ईजाद  की है मगर जिस किसी ने भी की होगी वो जीवन की खूबसूरती को बड़े ही अच्छे तरीके से समझता होगा। इस कहावत ने न जाने कितने ही लोगों को जीने की उम्मीद दी है। न सिर्फ उमीदें दी बल्कि हिम्मत भी दी है। ये कहावत जीने का सलीका भी सिखाती है। पर क्या ये कहावत हमेशा ही सब लोगों पर और हर हालात पर सही लागू होती है? आज की ये पूरी post इसी बात को समझने के लिए है।

आज मैं आप लोगों के साथ मेरी नजर में इस दुनिया की एक खुबसूरत प्रेम कहानी share करने जा रहा हूँ। ये कहानी लक्ष्मी अग्रवाल और उनके प्रेमी की है।

1990 में लक्ष्मी का जन्म दिल्ली के एक मध्यम परिवार में हुआ। वो बेहद शांत, खूबसूरत और खुशनुमा स्वाभाव की लड़की थी। मगर उसने कभी सपने में भी नही सोचा होगा कि 15 साल की उम्र में उस से दुगनी उम्र का कोई सरफिरा आदमी दिल्ली की खान मार्किट में अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर एक ऐसे गुनाह को अंजाम देगा जो उसकी पूरी जिन्दगी को हमेशा के लिए बदल देगा। ये बात 2005 की है है उस समय वो अपने स्कूल से लौट रही थी कि एक 32 साल के आवारा सरफिरे ने शादी के प्रस्ताव को नकारे जाने के कारण अपने दोस्तों के साथ मिलकर दिन दिहाड़े और भरे बाजार उस पर acid attack कर दिया।

इस acid attack में लक्ष्मी के face के साथ-साथ शारीर का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह झुलस गया था। उसके परिवार ने पूरे  जीवन भर की कमाई का पाई-पाई बेटी के इलाज पर खर्च कर दिया। इस भयानक घटना के बाद लक्ष्मी तो जिन्दा बच गयी मगर उनकी सूरत और शरीर पर गहरे घाव छोड़ दिए। इन घावों की वजह से होने वाली शारीरिक तकलीफ से कहीं ज्यादा वो तकलीफ थी जो ज़माने के बदले हुए रवैये से उसे हुई। एक लड़की ही ये ज्यादा अच्छी तरह समझ सकती है कि उस के लिए चेहरे का खुबसूरत होना कितना मायने रखता है। जब भी लक्ष्मी कहीं जाती तो लोग उसे अजीब तरीके से देखते थे। ये बात उसे बहुत दुःख पहुंचाती थी। लक्ष्मी का परिवार इस बात से खुश तो था की उसकी जिन्दगी खतरे से बाहर है मगर उतना ही लक्ष्मी के भविष्य को लेकर  चिंतित भी रहता था।

लक्ष्मी ने लेकिन हार नहीं मानी और डट कर जमाने के सामना किया। न सिर्फ उस ने ज़माने के नजरिये को defend किया बल्कि 2006 में लक्ष्मी ने इन तीनो आरोपियों के खिलाफ Delhi High Court में एक PIL दाखिल की और तीनो आरोपियों को जेल की हवा भी खिलाई। लक्ष्मी ने अपनी PIL में न सिर्फ आरोपियों को सजा बढ़ाने, मुआवजा दिलवाने की बात की बल्कि सरकार को मजबूर किया कि वो मौजूदा कानून में संशोधन करे और साथ ही साथ acid की open बिक्री पर भी बंदिश लगाये। ये लड़ाई कर सालों तक चली। जिंदगी की इसी लड़ाई के दौरान 2012 में उसके पिता की भी मृत्यु हो गयी। वो घर मे इकलौते कमाने वाले थे।

उसका  बड़ा  भाई भी dysfunctional lungs नाम की बीमारी से ग्रस्त हो गया। माँ का सारा समय भाई का ध्यान रखने में चला जाता था। लक्ष्मी ने परिवार चलाने के लिए सिलाई तथा beautician का काम सीखा और थोड़ा बहुत पैसे कमाने लग गई। एक लड़की जिस का खुद का face अब पहले जैसा खूबसूरत न रह गया हो वो अब दूसरों के पहनावे और face को सजाती थी। लोग उस से सहानुभूति तो रखते थे मगर आम लोगों जैसा व्यवहार नही करते थे। लक्ष्मी की मेहनत ने आखिरकार रंग लाया।  कानून में संशोधन होने में अगले 7 साल लग गए और 2013 में ये संशोधन भी हो गया।

जब लक्ष्मी अपनी जिंदगी के सब से बुरे दिनों को संभालने में झूझ रही थी तो उसकी मुलाकात आलोक दीक्षित नाम के आदमी से हुई जो कि journalist तथा social activist भी थे। इस पुरे सफ़र में उन्होंने laxmi का भरपूर साथ दिया। आलोक ने बहुत गहराई से जाना कि अगर एक लड़की के पास बाहरी खूबसूरती न रह जाये तो उसे कितना ही कठिन जीवन जीना पड़ता है। मगर आलोक ने सारी traditional विचारों को दरकिनार किया और अपना जीवन लक्ष्मी के साथ बिताने का निर्णय लिया। उनके विश्वास और प्यार की सीमा सिर्फ यही नहीं हैं। 2014 में उन्होंने एक दूसरे के साथ बिना विवाह के साथ रहने का निर्णय भी लिया। वो कहते हैं कि वो नही चाहते कि लोग उनकी शादी में आएं और उनकी भद्दी शक्ल में बारे में comment करें। वो कहते हैं कि वो मरते दम तक एक दूसरे का साथ निभाएंगे और जमाने को बता देंगे कि शादी मन से होती है रिवाज से नहीं।

लक्ष्मी कहती है कि मेरे चेहरे की 7 बड़ी surgery होने के बाद मैंने कभी नही सोचा था कि मुझे कभी कोई soulmate मिलेगा। soulmate तो दूर की बात मैं तो सोचती थी कि मुझे तो कोई अपनाने को भी तैयार नही होगा।

आलोक कहते हैं कि जैसे लोगों को प्यार होता है वैसे ही उन्हें भी लक्ष्मी से प्यार हुआ है। ये सही है कि उसका चेहरा जला हुआ है और वो नजर भी आता है मगर ये हमारे प्यार के बीच कभी नही आया। लोगों को उनका जला हुआ चेहरा ही नजर आता है मगर मुझे उनके अंदर की खूबसूरती लड़की की भावनाएं नजर आती है। मुझे जो बात सबसे ज्यादा आकर्षित करती है वो ये कि लक्ष्मी ने अपने चेहरे को चार दिवारी में न छुपाकर पूरी हकीकत को accept कर जमाने का सामना किया।

आलोक के इस कदम की जितनी भी तारीफ की जाए को कम है। आलोक ने दुनिया के तय किये गए “खूबसूरती” के पैमानों को झूठा साबित कर दिया और  इंसानियत की नई मिसाल पेश कर दी।

आज लक्ष्मी और उस का परिवार बेहद खुश और सम्पन है। Nov 2015 में लक्ष्मी और आलोक एक नन्ही परी के माता पिता बन गए। उस नन्ही परी का नाम पीहू है।

आज लक्ष्मी और आलोक मिलकर “Chaanv Foundation” (छांव फाउंडेशन) नाम की NGO को संभालते हैं जो acid attack के प्रभावितों के लिए काम करती है।

लक्ष्मी को 2014 में ही मिशेल ओबामा ने US में  “International women of courage” खिताब से भी नवाजा था। उसी साल वो NDTV Indian of the year भी बनी।
दोस्तों, ये कहानी न सिर्फ एक प्रेम कहानी है बल्कि संघर्ष, वचन, जीत और समाज के एक भद्दे रूप की भी कहानी है। न जाने कितनी ही ऐसी लक्ष्मी जैसी बेटियों, जिन पर इस तरह के acid attacks हुए हैं, की जिंदगी आज इतनी खुशहाल नही है। 32 साल के उस आदमी की मानसिकता भी है तो हमारे ही समाज की उपज है। ये कहानी एक बहुत बड़ा प्रश्न हम  सब के सामने छोड़ कर जा रही है। और वो प्रश्न है कि कोई भी बच्चा पेट से तो सब सीख  कर नही आता है। कहीं न कहीं कुछ ऐसा है हमारे समाज या इसके तौर तरीकों में जो इस तरह की सोच को जन्म देता है। हम सब की जिमेदारी है कि ऐसी उन सभी कारणों का पता करें और उन्हें सही करने के लिए कदम उठाएँ। महिलाओं के प्रति बढ़ रहे अपराध एक अच्छे समाज की पहचान नही है। कानून दोषियों को तो सजा दे सकता है मगर दूषित सोच को नहीं। इस सोच को बदलना तो बस हम सब के हाथ में  है।

कुछ ज्यादा नहीं बस हर व्यक्ति अगर अपने आस पास के खुद के circle में भी ये जानने की कोशिश करें कि आखिर ये मानसिकता develop होती क्यों है और अपने level पर अच्छी और सही education से ऐसी मानसिकता को correct करने की कोशिश करे तो जरूर फर्क नजर आएगा।

दोस्तों, कोई भी अप्रिय घटना कभी भी अच्छी नही हो सकती। अप्रिय तो अप्रिय ही रहती है चाहे वो कितनी ही छोटी क्यों न हो। मगर एक चीज है जो हमारे हाथ मे है और वो है अप्रिय घटनाओं को लेकर हमारा RESPONSE। हम हर अप्रिय घटनाओं के प्रति react कैसे करते है, ये जिंदगी के आगे के सफर को तय करता है। जो हो चुका है उसे तो बदल नही जा सकता मगर ऐसी घटनाएं भी अपने पीछे कुछ न कुछ ऐसा छोड़ जाती है जिसे हम अपने पक्ष में कर सकते हैं। और ऐसा कुछ कर पाना ही महान को महान बनाता है। शायद यही एक तरीका है जो साबित करता है कि “जो भी होता है वो अच्छे के लिए होता है”। 


आपका दोस्त

मनोज शर्मा

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Picture Sources: Internet

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Manoj Sharma

Writer, Trainer and Motivator

5 Comments

D N Mahto · October 2, 2017 at 6:39 am

D N Mahto

Anonymous · September 16, 2017 at 8:34 am

U write well! Keep up the good work 😊

Anonymous · September 9, 2017 at 4:06 pm

Good

Nisha · September 9, 2017 at 2:51 pm

Very welldone

Kiran · September 9, 2017 at 11:01 am

Very very nice

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