“माँ”

माँ कागज़ है कलम है स्याही है
माँ निरंकार परमात्मा की सच्ची सी
गवाही है

माँ बचपन की अनमोल कहानी है
माँ कागज की कश्ती
बारिश का पानी है

माँ मेरा खेत
खलिहान है
माँ मेरा गाँव
हिदुस्तान है

माँ सफलताऔं का शगुन है
माँ माथे पर लगा सलामती का कुमकुम है

माँ सहनशीलता की मूरत है
डांट लगा कर जो भोजन खिलाए
वो क्षमता सिर्फ माँ के पास है
इसलिए उस माँ मे ईश्वर की सूरत है

माँ मन्दिर की देवी
पूजा की थाली है
माँ दर्द मे मीठी दवा की
प्याली है

माँ यादो मे आती हिचकी है
माँ बच्चों के जख्मों पर रोती हुई सिसकी है

माँ सुकुन है
माँ प्यार का प्यारा सा जूनुन है

माँ गज़ल का शेयर है
माँ सुबह शाम दोपहर है

माँ प्यारा सा गीत है
माँ सच्ची प्रीत है

माँ सुख भरी निदियां है
माँ चुड़ी कगन बिंदिया है

माँ बच्चों के चेहरे की मुस्कान है
माँ ही ईश्वर का सच्चा सम्मान है

maa

माँ परिवार है
माँ संसार है

माँ बहता झरना है
माँ बच्चे का पलना है

माँ नदी
माँ सागर है
माँ खुशियों की गागर है

माँ जमीं
निला आसमान है
माँ जिदंगी जीने का
अरमान है

माँ सागर मे उठती तरंग है
माँ हाथों मे खिलता मेहदी का रंग है

माँ जीने की आस है
माँ जो न बुझ सके वो प्यास है

माँ हर खुशी
जिदंगी है
माँ दुआ
माँ बदंगी है

माँ भगवान का दुसरा नाम है
माँ मेरे चारो धाम है

माँ कमजोरी मे
ताकत है
माँ ताउम्र की लागत है

माँ जगत जननी
ममता से भरी है
माँ बिना ब्रह्मांड की
कल्पना अधूरी है

रहुं सरहद पर भी मैं महफूज
माँ की दुआ का असर है

दुनिया में सबकी माँ को सलामत रखना
ए- खुदा
क्योंकि माँ से ही सृष्टि का सफर है।

रेणुका चौहान


2 Comments

Devyani verma · November 4, 2017 at 9:21 pm

Beautiful lines

Rajinder kumar · November 4, 2017 at 6:39 pm

Nice and so sweet

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