बढ़ उत्कर्ष की ओर
उत्कलित तू दुनिया के बधंन से
भाकर जैसे उज्जवल हो
कर नशन अधिंयार का लक्ष्य चयन से

लक्ष्य चुन कर समझ उसे
पथ की गहराई को भी जान ले
लक्ष्य निधारण के समय.
मुश्किलों का मिजाज पहचान ले

होगा नवोन्मेष भारत का
यदि राह पर रहोगे अटल
वक्ष तनो आगे बढ़ो
भय का कर दो कतल

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स्वर्ण अक्षरो मे रचित होगा
इतिहास के पन्नों मे नाम
बहक न जाना राह से,
न लगने देना
मेहनत पर लगाम

यादगार बनना है या रचना हो गौरवमय इतिहास
रात जागो
दिन रात भागो
लक्ष्य प्राप्ति तक न छोडो साहस

लक्ष्य अपना चुनो हट कर
उद्देश्य हो जिसका नेक
न देखो उस ओर
जहाँ दिखे शक्सियत अनेक

भीड़ मे चला हर कोई
देख के अपनों को आस पास
पर तुम लीक से हटकर चलो
भले हो जाय परिहास

न होगा लक्ष्य ओझल
हिम्मत रखकर चल
सफलता एक दिन कदम चुमेगी
आज नहीं तो कल

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रेणुका चौहान
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1 Comment

Vikas Singh · November 17, 2017 at 6:19 pm

Superb! Imagine thinking

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