यह बात 11 फरवरी 1990 की है। जापान के शहर Tokyo Dome की यह शाम एक ऐतिहासिक शाम होने वाली थी। सारे शहर की दीवारें “Tyson Is Back” लिखे हुए पोस्टर से सुसज्जित थी। पूरे विश्व के लोग रेडियो पर अपने कान अथवा टेलीविज़न पर टकटकी लगाए बैठे थे। विश्व में जिस से भी बन पड़ा था वह टोक्यो शहर के उस स्टेडियम में पहुँच चुका था।

और हो भी तो क्यों न। यह शाम professional boxing के heavy weight champinship match की शाम थी। किसी मामुली challanger ने Tyson को  ललकारा था। दो अमेरिकी  boxer आज आमने-सामने आने वाले थे। मगर दर्शक बार-2 एक दूसरे से ’38-0″ शब्द कह रहे थे। ये लोग उस समय में boxing की दुनिया मे बादशाहत रखने वाले Mike Tyson तथा boxing के खेल प्रेमी थे। अब तक के अपने कैरियर में इस महान खिलाड़ी ने 37 मैच में से सभी मैच जीते थे।

जमाना गवाह था कि Tyson के knowckout punch के बाद आज तक कोई भी “10” के count में अपने पैरों खड़ा नहीं हो पाया था।  लोग Tyson की इस काबिलियत के दीवाने थे। और ये सारे दीवाने अपनी आँखों से ऐसा ही कुछ और देखने के लिए विश्व भर से यहाँ जमा हुए थे। सभी बस पागल थे कि अपनी आँखों से Tyson को ऐसा करते देख सके और 38-0 के उस पल का गवाह बन जाये।

1987 के बाद से अब तक कोई भी Tyson से 5 round से ज्यादा नहीं खेल पाया था। Tyson से सभी लोगों को उम्मीद थी कि इस बार नया challenger तो 5 राउंड भी नहीं खेल पायेगा। Tyson के “cornermen” भी इसी उम्मीद मै थे कि Tyson के लिए यह किसी warm up मैच से ज्यादा कुछ नहीं था। इसीलिए वो उस दिन अपने साथ “ice pack” या “endswell” भी नहीं लेकर आये थे। सभी को मालूम था कि यह मैच शायद ही 2 राउंड तक चल पाएगा।

Tyson अपना World Heavy Weight Title को defend करने और “38-0” knowkout streak को जारी रखने के लिए अपना सीना चौड़ा कर रिंग में उतरे। उनके सामने जो challanger था उसका नाम था Buster Douglas।

James Douglas 6 फ़ीट का एक boxer था। James को buster के नाम से भी जाना जाता था। मगर James को विश्व मे ज्यादा populariry प्राप्त नहीं थी। आज पहली बार उसका सामना Tyson से था।

Bell की आवाज के साथ ही मैच शुरू हुआ। मैच के शुरू से ही James अपनी कद काठी का advantage लेने में सफल रहा और शुरू के rounds में अपनी पकड़ मजबूत बनाये रखी। ऐसा लग रहा था जैसे Tyson पूरी तैयारी से नहीं आये और अपने प्रतिद्वंद्वी को कम आंकने के गलती कर बैठे थे। 5वा round शुरू हो गया था और अभी तक Tyson कुछ खास नहीं कर पाए थे। 5वें round के अंत तक chmapion की बायीं आंख बहुत ज्यादा सूज गई थी। James के powerful right punch ने अब तक champion के नाको तले चने चबा दिए थे।

उस समय commentator भी कह रहे थे कि उन्होंने आज तक Tyson को इस तरह की सजा सहते नहीं देखा था। सभी को हैरानी हो रही थी कि आखिर Tyson के सारे दाव-पेच effective क्यों नहीं रह गए थे। 7वें round के अंत तक Tyson की बायीं आंख लगभग बंद हो गयी थी। 8वें राउंड में Tyson ने अपने गुस्से और अपनी काबिलियत का जलवा दिखाते हुए Douglas के उपर एक जोरदार right uppercut knowkout से वार किया। यह वार इतना जबरदस्त था कि Douglas चक्कर खाकर रिंग में गिर पड़ा। Refree ने counting शुरू कर दी। Counting 7 तक पूरी होने पर भी Douglas लगभग असहाय था। लेकिन counting पूरी होने से ठीक पहले Douglas लड़खड़ाते हुए अपने पैरों पर खड़ा हो गया।

9वें round के शुरू से ही Tyson ने Douglas पर attack करना शुरू कर दिया। वो जानता था कि 8वें round से Douglas चोटिल है। मगर Douglas ने multi punch combination से Tyson को रिंग की रसियों पर लिटा दिया। जैसे तैसे match 10वें round तक पहुंच गया।

10वें राउंड के शुरू से ही Douglas अपनी position strong रखे हुए था। राउंड के बीच में ही Douglas ने Tyson के ऊपर right अपरकट के साथ four punch combination दे डाला। अभी तक का 37-0 से विजयी रहा undisputed champion पहली बार अपने घुटनों के बल पर रिंग में बैठा था। Tyson का mouthpiece पहली बार उसके मुँह से बाहर निकल कर गिर गया। Counting शुरू हो गई। Mike Tyson से अपने mouthpiece को जैसे तैसे वापिस adjust करने की कोशिश की। मगर मुह से बाहर लटके mouthpiece देख कर दुनिया समझ गयी थी कि counting पूरा होने तक boxing के बेताज बादशाह अब फिलहाल के लिए champion नहीं रह गया है।

James Douglas अब नया champion बन गया था। यह fight खेल की दुनिया की सबसे बड़ी फेर बदल वाली घटना बन गयी। Douglas के जीवन की यह सबसे बड़ी fight थी। उस दिन के बाद Douglas को एक मुकमल पहचान मिली। Douglas को आज भी सिर्फ इसी match के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है।

सभी मौजूद लोग ये जानने के लिए उत्सुक थे कि आखिर Douglas ने ये कारनामा कैसे किया। मैच के बाद Douglas ने जब press confrence में इस बात का उत्तर दिया तो सब लोग हैरान रह गए। Douglas का उत्तर सुनने के बाद लोग इस बात पर सहमत हो गए कि चाहे कुछ भी हो जाता मगर उस दिन Douglas को जीतना ही था। उस दिन Douglas से जीत को कोई भी छीन नहीं सकता था।

Douglas ने कहा कि world heavyweight champion का वो टाइटल वह अपनी उस माँ के लिए dedicate कर रहा है जिसकी मौत उस मैच के 23 दिन पहले ही हुई थी। उसकी माँ उसे boxing के लिए सबसे ज्यादा प्रेरित करती थी। मरने से पहले उसकी माँ ने उस से कहा था कि वह किसी भी तरह से अपनी practice को कम न करे क्योंकि वह चाहती है कि उसका बेटा Tyson को हरा कर title अपने नाम कर दे। उसकी माँ अक्सर उस से कहा करती थी कि एक दिन आएगा जब उसका सामना Tyson से होगा और जीत उसके बेटे की ही होगी।

Douglas ने बताया कि Tyson से जीत कर title अपने नाम करना उसकी माँ की आखिरी ख्वाहिश थी। उसने कहा कि उसकी माँ को पूरा यकीन था कि उसका बेटा ऐसा जरूर करेगा। वह match देखने के लिए जिंदा नहीं रही मगर उसके मरने के बाद वह अपनी माँ को झूठा साबित नहीं करना चाहता था। वह चाहता था कि चाहे कितना ही मुश्किल क्यों न हो मगर वह Tyson को हरा कर दिखायेगा जिसे आज तक किसी ने world champinship में न हराया हो।

उस दिन Douglas को जीतना ही था क्योंकि इस दिन Douglas के जीतने के पीछे का “क्यों” बहूत बड़ा था। Tyson के “क्यों” से भी बहुत बड़ा। Tyson के लिए यह सिर्फ एक warm-up fight से ज्यादा कुछ नहीं थी मगर Douglas के लिए अपनी स्वर्गवासी माँ के अंतिम कथन को सत्य करने का एक मौका था। ‘Warm-up’ Vs ‘माँ की अंतिम इच्छा को पूरा करना’: इन दोनों ही कारणों को देख स्वतः ही ये प्रतीत होता है कि किसका “WHY” ज्यादा शक्तिशाली था।

सफलता के लिए “How” से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होती है “Why”। सफलता के लिए 90% contribution ‘why’ का होता है जबकि मात्र 10% role ‘how’ का रहता है। Your WHY is much more important than your HOW.

जब आप को यह पक्का मालूम हो जाये कि आप को सफल “क्यों” होना है तो “कैसे” के जवाब या रास्ता आपको मिल ही जाता है। चाहे कितनी ही मुश्किलें आए या फिर कितना ही असफलताएं आपका रास्ता रोके, आपको अपने “कैसे” का जवाब मिल ही जाता है। “कैसे” का जवाब मिल जाने तक की ताकत आपको आपके “क्यों” से मिलती है।

मगर यदि आप अपने सपने या goal के पीछे के “क्यों” को  सही से नहीं जानते है तो कितनी ही शक्तिशाली strategies का इस्तेमाल कर लें मगर ये सारी की सारी strategies आपकी मदद नहीं कर पाएंगीं।

जब भी कभी आप ये जानना चाहें कि आपका किसी भी काम को करने के पीछे का “क्यों” कितना शक्तिशाली है तो अपने आप से ये निम्न प्रश्न पूछें:

  • अपने आप से पूछें कि आप जो भी कर रहे हैं वो आप क्यों कर रहे हैं या क्यों करना चाहते हैं?
  • इस सब के पीछे आपका मकसद क्या है?
  • आपके जीवन के long term vision में इस सब का क्या योगदान है।
  • अपने आप से पूछें कि आप अपने goal तक पहुंचने वाले इस सफर में आने वाली मुश्किलों को कैसे enjoy कर सकते हैं।
  • क्या आपके purpose के पीछे के कारण (why) असफलताओं और मुश्किलों से होने वाले दर्द से ज्यादा सुकून दे सकती है

    याद रखें “WHY” आपके goal या target के emotional component को रिप्रेजेंट करता है। इसलिए अपने dream या goal को जितना हो सके emotionalize करें।

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    Manoj Sharma

    Writer, Trainer and Motivator

    6 Comments

    Anonymous · August 9, 2018 at 10:06 pm

    Ek bhi word miss nahi kiya…. Mine blowing sir .

    Anonymous · July 24, 2018 at 1:41 pm

    Bahut achha. Motivational

    Rakesh Kumar · July 12, 2018 at 10:59 am

    It inspired me a lot.

    Ruchi Verma · May 2, 2018 at 7:49 pm

    Great, inspirational

    Sandesh Thakur · April 17, 2018 at 3:47 pm

    Very nice

    Yashpal Sharma · April 16, 2018 at 7:15 pm

    awesome. great inspirational story ..

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