TV बंद तो जिंदगी शुरू। Turn Off The TV To Turn On The Life

“किसी भी बड़े मंहगे product या brand की advertisement TV पर नहीं आती है क्योंकि “सफल और बड़े लोग TV नहीं देखते हैं”

आखिर क्यों??

जब मैंने किसी newspaper में ये lines पढ़ी थी तो इस बात ने मेरा ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। बड़े luxury brands जैसे कि अगर cars की बात करें तो Audi, BMW, Mercedes, Jaguar, Porsche आदि की advert TV पर नहीं आती है। और ये बात बिल्कुल सच भी है।

मेरी रुचि इस तरफ और ज्यादा बढ़ गयी थी और इसका कारण था कि मैं अपना सारा बचा हुआ समय TV देखते हुए गुजारता था। यद्यपि मुझे किसी तरह की कोई movies, series आदि देखने का शौक तो नहीं था मगर मैं news channels, infotainment channels जैसे कि Net Geo या Discovery तथा Sports आदि चेनल्स ही देखता था।

फिर भी दिन में सारा का सारा बचा हुआ समय मेरा TV के सामने गुजरता था। मेरा मानना था कि विश्व की day to day happenings से up to date रहने के लिए इतना तो बनता ही है। TV देखना अब मेरी आदत भी बन गयी थी क्योंकि ये कई सालों से चला आ रहा था।

मगर जिस दिन मुझे ये मालूम हुआ कि सफल लोग TV नहीं देखते हैं, मैंने ठान लिया कि इस विषय में थोड़ा बहुत research जरूर करूँगा और जानने की कोशिश करूंगा कि ये सफल लोग आखिर ऐसा क्यों करते हैं और अगर ये लोग TV नहीं देखते हैं तो फिर अपने आप को current affair से update कैसे रखते हैं?

दोस्तों जब मैंने ये जानना शुरू किया कि TV देखने के नुकसान कितने हैं तो मैं हैरान रह गया। चूंकि मैं स्वयं एक mind trainer हूँ इसलिए थोड़ी सी practice से ही मैंने अपनी ये आदत सुधार ली। मैं एक दिन मैं 15 मिनट से ज्यादा TV नहीं देखता हूँ। मेरे इन 3 महीनों के अनुभव को ही मैं आपके साथ आज share करूँगा।

TV एक महान खोज है जिसने विश्व के हर एक कोने को एक दूसरे से लगभग real time में जोड़ दिया है। TV न सिर्फ हमें विश्व की हर खबर से अवगत करवाता है बल्कि आज दुनिया में मनोरंजन का सबसे बड़ा माध्यम भी बन चुका है। इसलिए TV के बारे में कुछ भी लिखना अपने आप मे एक अहम विषय है।

हर technology की तरह जहाँ TV के अनेकों ही फायदें है वहीं अनेकों ऐसे दुष्प्रभाव भी है जो जीवन के लिए अभिशाप बन जाते जातें हैं।

ये बात अपने आप में हैरान करने वाली है कि विश्व में एक आम आदमी सप्ताह में तकरीबन 24 घंटे TV देखता है। कुछ लोग हो सकता है इस बात को लेकर एक बहस शुरू कर दें कि थोड़ा बहुत TV देखना कोई नुकसान नहीं पहुंचता है।

इसका निष्कर्ष आप स्वयं निकाल सकते हैं। आप पूरे दिन भर, news, serials, youtube, movies etc पर बिताए जाने वाले समय को calculate करें और देखें कि कितना ही समय screen पर बिताते हैं।

आइये जानें कि TV के दुष्परिणाम क्या हैं?

1) समय की बर्बादी:

जब आप TV देखते हैं तो कुछ और नहीं कर रहे होते हैं। यह समय आपने एक ऐसा काम करन में व्यर्थ गवाँ दिया जो आपके दिन की productivity में कोई योगदान नहीं दे रहा है।

2) बढ़ती सामाजिक दूरी:

सामाजिक संपर्क एक इंसान की जरूरत है। समपर्क बनाने के लिए आप जितना समय देंगे उतना ही निजी और व्यावसायिक जीवन के किये फायदेमंद रहेगा। और निच्छित ही TV किसी भी तरीके से सामाजिक संपर्क बनाने में आपकी मदद नहीं करता है।

3) दिमाग की नकारात्मक प्रोग्रामिंग

बहुत ही कम TV न्यूज़, show या movie ऐसी होती है जो सकारात्मक विचार को प्रदर्शित करते हैं। जाहिर है जब आपका सामना लगातार नकारात्मकता से होगा तो उसका असर जीवन पर जरूर पड़ेगा।

4) TV आपके belief system को distort करता है।

जरा ध्यान से सोचिये कि comedy shows में आप अक्सर किन बातों पर हंसते हैं? सोचिये कि ज्यादातर फिल्में आपको क्या सिखाती हैं? सोचिये कि ज्यादातर खबरें किस तरह की होती है?

अगर आप ध्यान से सोंचें तो पाएंगे कि TV पर देखे जानें वाली ज्यादातर बातें जीवन के प्रति आपके नजरिये को दूषित करती है।

4) अवास्तविक उमीदों (unrealistic expectations) की उत्पत्ति

जीवन पर्दे या screen पर दिखाई देने वाले जीवन से बहुत अलग होता है। अगर किसी भी celebrity से ये पूछें तो वो बताते हैं कि पर्दे के जीवन काल्पनिक होता है और हकीकत से कोसो दूर भी। लोग TV पर दिखाई देने वाले जीवन के हिसाब से ही अपने जीवन को भी उमीदों से भर देते हैं जबकि उस जीवन के लिए उतने efforts नहीं करते हैं और फिर जब वो पूरी नहीं होती है तो पीड़ा, घृणा, अवसाद, और निराशा से बबर जाते हैं। ये असर छोटी उम्र में ज्यादा होता है।

5) अपर्याप्तता का अहसास (feeling of inadequacy)

TV की दुनिया को देखते हुए लोग अक्सर अपने जीवन को TV पर दिखाई जाने वाली life style के साथ compare करना शुरू कर देते हैं और डर ये महसूस करते हैं कि उनका अपना जीवन बिल्कुल भी अच्छा नहीं है और निराश हो जाते हैं।

6) अवचेतन प्रोग्रामिंग एवं विज्ञापन (subconscious programming and use for advertisement)

यह बात सबसे महत्वपूर्ण है। ये बात समझने में कतई भी गलती न करें कि TV की दुनिया बिना विज्ञापन के नही चल सकती है। कोई भी TV show आदि महान कला या ज्ञान के संदर्भ में नहीं बनाया जाता है। ज्यादातर shows को इस तरीके से design किया जाता है कि आपको आपके TV के सामने बैठने पर मजबूर किया जा सके।
हर शो का मकसद ज्यादा से ज्यादा advertisements को आप तक पहुंचाने के लिए किया जाता है। हर advertisement इस तरीके से बनाई जाती है कि कहीं न कहीं आपको अपना जीवन मे कोई कमी महसूस हो और दिखाए जाने वाले product को खरीदने के बाद ही आप अच्छा महसूस करें।

सभी बड़े कॉरपोरेट्स इन shows को sponser करते हैं और बड़ी चालाकी से आपके अवचेतन मन को अपने products के लिए program करते हैं।
ये बात हमेशा याद रखिये कि कोई भी show और advertisement के पीछे psychology का बहुत अच्छा प्रयोग किया जाता है। ये बात जितनी जल्दी आप समझ पाएं उतना ही अच्छा है।

7) आपके जीवन स्तर और नियंत्रण

आपने महसूस किया होगा कि TV देखते समय अपने आपको रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है। साफ है आप self control, self discipline पर नियंत्रण खो देते हैं। और इन दोनों के अभाव के दुष्परिणाम आप भली भांति जानते हैं।

8) सेहत पर दुष्परिणाम

ये समझना कोई rocket science नहीं है कि screen टाइम बढ़ने और active time घटने से आपका शरीर सैंकड़ों मानसिक और शाररिक बीमारियों के घेरे में आ जाता है।

फिर क्या करें? So what do I do?

मेरा सुझाव है कि ऐसी आदतों, hobbies आदि को चुनें जो जीवन को uplift करती हों। जैसे कि किताब पढ़ना, कोई स्पोर्ट्स क्लब join कर लेना, motivational audio-video देखना। अच्छी magazines को subscribe करें और पढ़ें। अपने परिवार दोस्तों आदि के साथ उपयुक्त समय बियाएँ।

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