दोस्तों,

ये एक बहुत महत्वपूर्ण post है। ये पोस्ट हर एक व्यक्ति के जीवन से बिल्कुल सीधा संबंध रखती है। मुझे लगता है अभी तक कि हिंदी posts में से ये सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण post है।

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निर्णय लेना (decision making) आपके जीवन का एक बहुत महत्वपूर्ण कार्य है। आप का जीवन आज जिस भी स्थिति में है वो आप के द्वारा लिए हुए निर्णय (decision) और चुने हुए विकल्पों (Options) का ही नतीजा है। आप रोजाना न जाने कितने ही निर्णय लेते हैं और फिर विकल्पों को चुनते है। कुछ निर्णय आप के लिए सही साबित होते है और कुछ का असर विपरीत होता है।

मैं सिर्फ उन बड़े निर्णयों की बात नहीं कर रहा हूँ जो आप जो सप्ताह या महीने में एक दो बार लेते हैं। मैं उन सभी निर्णय और चुनाव की बात कर रहा हूँ जो आप दिन में सुबह उठने से लेकर सोने तक सैंकड़ों या हजारों बार करतें हैं। जैसे कि सुबह उठते ही आप सुबह उठने के बाद चाय पीने का निर्णय लेते हैं या कॉफ़ी का।

हर रोज कौन से कपड़े आप पहनने का निर्णय लेते हैं, कौन सी गाड़ी में अपने काम पर जाना पसंद करते हैं कौन से नेता को support करते हैं, कौन से गाने सुनना पसंद करते हैं, किस तरह की संगत पसंद करते है, किसी परेशानी ने आप किस तरह के कदम उठाते हैं या कैसे react करते हैं इत्यादि। यानी कि वो सब कुछ जो भी आप दिन में करतें हैं वो सब जो आप किसी विशेष विकल्प को चुनने के लिए करतें हैं।

यही नहीं आप किस तरह के शब्दों का प्रयोग बात-चीत के लिए करते हैं, या फ़िर किस तरह से लोगों के साथ पेश आतें है।

मतलब जो भी कुछ भी आप ने decision लिया या फिर विकल्प का चुनाव किया, वो क्यों किया या फिर कैसे बहुत से विकपों में से सिर्फ उसी एक विकल्प का चुनाव किया?

चूंकि आप की जिंदगी विकल्पों का ही नतीजा है इसलिए ये जानना अति महत्वपूर्ण है कि आप विकल्प चुनने का निर्णय कैसे लेते हैं तभी कहीं जाकर आप अपनी निर्णय शक्ति को बढ़ा सकते हैं और इस से अपने मन मुताबिक काम भी ले सकते हैं।

“आज आपका जीवन जिस भी स्थिति में है, वो आपके जीवन भर के किए गए निर्णय और चुने हुए विकल्पों का नतीजा है”

आज मैं आपको ये बताने की कोशिश करूंगा कि क्यों और कैसे आप अपने विकल चुनते है और निर्णय लेते हैं?

इसकी शुरुआत मैं बॉलीवुड की सबसे shocking आत्महत्या की बात से शुरू करूँगा। ये बात प्रत्युषा बैनर्जी की आत्महत्या की है। आपको ज्ञात होगा प्रत्युषा का नाम भारतवर्ष के हर घर में चर्चित रहा है। इस कलाकारा ने TV की दुनिया मे बेतहाशा नाम और शोहरत कमाई थी। इसकी शुरुआत “बालिका वधु” में उसके lead role से शुरू हुई और फिर “झलक दिखला जा, बिग बॉस जैसे अनेको ही TV serial तक चलती रही। प्रत्युषा ने मात्र 5 वर्षों में ही 25 से ज्यादा TV Shows में या तो काम किया या participate किया है। इन 5 वर्षों में उसने कई awards जीते और दर्जनों भर मे nominate भी हुई।

मगर ये सब प्राप्त करने के बाद भी 1 अपैल 2016 को उसने आत्महत्या कर ली। 1 अप्रैल 2016 को उसका दिमाग उसके अपने ही दिल से हार गया।

जरा सोचिए ये सब उसने तब किया जब वो अपने जीवन के शिखर पर थी और सफलता की बुलंदियों को छू रही थी। वो इन 5 सालों में जो भी कुछ अर्जित कर चुकी थी मुम्बई की गलियों में भटक रहे 99% लोगों के लिए वो सिर्फ एक सपना भर होता है। लोग कहते हैं कि वो अपने प्रेमी से रिश्ता टूटने से सदमे में थी।

क्या किसी के दिल का रिश्ता पहली बार टूटा था? क्या सभी टूटे दिल के लोग यही करते हैं? आपको क्या लगता है कि जो भी प्रत्युषा ने किया वो एक समझदारी भरा कदम था? क्या आपको नहीं लगता कि उस के पास आत्महत्या से भी बेहतर और कई विकल्प थे? मगर उन सब विकल्पों को छोड़ उसने आत्महत्या को ही क्यों चुना? आखिर ऐसा क्या है कि इतनी समझदार, पढ़ी लिखी लड़की और सफल लड़की ने ये कदम उठाया?

और क्या आत्महत्या आज एक रोजाना की खबर नही हो गई है? यहां तक कि पढ़ाई कर रहे बच्चे भी इस मानसिकता का शिकार है।

अब थोड़ा गौर से सोचिये कि आपको नही लगता पूरे दिन भर आपका भी दिल आपके दिमाग से जीत जाता है? अनेकों बार ही आपके द्वारा गहनता से सोचे गए काम आप कर नही पातें क्योंकि बस “दिल ही नही करता“?

कौन है जो हमारे अंतिम निर्णय लेता है?

दिल! जी हाँ। दिल ही आपके जीवन पर राज करता है। यही है जो आपके जीवन को नियंत्रित करता है। याद रखिये दिल दिमाग से अनेकोनेक गुणा शक्तिशाली है।
यहाँ दिल का मतलब आपका अवचेतन मन है। दिमाग का मतलब आपका चेतन मन है। आप कितनी ही जीतोड़ कोशिश कर ले कि आपका दिमाग जीत जाए पर अन्ततः जीत दिल की ही होती है। दिमाग से दिल को हराना नामुमकिन है क्योंकि दिल (अवचेतन मन) के पास 90% शक्तियां होती है जबकि दिमाग (चेतन मन) के पास मात्र 10% ही शक्तियां होती है।

वैज्ञानिक भी तरह तरह के प्रयोगों से ये साबित कर चुके हैं कि मनुष्य का अवचेतन मन बहुत शक्तिशाली होता है और जीवन पर इसी का ही नियंत्रण रहता है।
वैज्ञानिक ने ये भी पता लगाया है कि मनुष्य जितने भी निर्णय लेता है वो निर्णय सिर्फ मनुष्य का अवचेतन मन ही लेता है। ये निर्णय चेतन में आने से पहले अवचेतन में पहले से ही लिए जा चुके होते है।

मनुष्य इस आभास में रहता है कि जो भी निर्णय वो लेता है उसे वो दिमाग (चेतन मन) से लेता है, मगर सच्चाई ये है कि कोई भी लिया हुआ निर्णय चेतन मन (दिमाग) मे आने से पहले ही अवचेतन मन (दिल) मे बन कर तैयार हो जाता है। फिर इस निर्णय को दिमाग मे भेजा जाता है जो इसे कार्य मे तब्दील करवाता है।

इसका मतलब ये हुआ कि जो कुछ भी आप ने आज तक किया उसे करने का निर्णय आपके दिल ने लिया है दिमाग ने नहीं। चाहे फिर वो सुबह की चाय हो या फिर कोई बहुत बड़ा निर्णय हो।

दिल (अवचेतन मन) निर्णय कैसे लेता है?

बुद्धि (Intelligence), विचार (reasoning), विश्लेषण (analysis), तुलना (comparison), तथ्य (logic) आदि ये सब दिमाग यानी चेतन मन (conscious mind) की ताकतें है। मगर इन सब का अवचेतन मन के लिए कोई मतलब नहीं होता न ही इन सब से अवचेतन मन को प्रभावित किया जा सकता है। अवचेतन मन तो सिर्फ और सिर्फ भावनाओं (feelings and emotions) को समझता है। अवचेतन मन का भंडार तो value system और मान्यताएं (belief system) के रूप में छिपा होता है।

चेतन मन सही-गलत या कम-ज्यादा का फर्क कर सकता है मगर अवचेतन मन ये सब नहीं समझता है। ये तो बस भावनाओं को समझता है। जो भावनाएँ सुखदायी (pleasurable) होती है उनकी ओर आकर्षित होता है और दुखदायी (painful) भावनाओं से दूर भागता है।

इसका मतलब ये हुआ कि जब भी आप विकल्प चुनने का निर्णय (decision) लेते हैं तो आपका अवचेतन मन सिर्फ उस विकल्प को चुनता है जिसमे नीचे की तीनों बातें मौजूद हो:

  1. जो आपके मौजूदा belief system या value system को match करती हो।
  2. जो आपके अंदर सबसे ज्यादा सघन feelings जगाती हो।
  3. और जो आपको pleasue देती हो और pain से बचाती हो।

अब जरा सोचिये कि आप हर नई साल अपने लिए एक new year resolution की लंबी list तैयार करते हैं। आप उसमे अपने पूरे दिमाग का इस्तेमाल करके ये decide करते हैं कि नए वर्ष आप क्या क्या करना चाहते हैं। एक हिसाब से पूरे वर्ष के goal आप decide करतें हैं।

और फिर अपनी पूरी बुद्धि का इस्तेमाल कर आप इसके लिए एक जबरदस्त plan भी बना लेते हैं।
मगर फिर न जाने क्या हो जाता है कि अगले एक सप्ताह भर भी आप इस plan को follow नहीं कर पाते हैं। न जाने क्यों फिर सोच समझ कर decide किये गए plan को follow करते करते आप ऊब जाते हैं।

ये सब इसलिए हुआ क्योंकि आप ने सिर्फ अपने चेतन मन का सहारा लिया। जो भी कुछ आप ने करने का सोचा वो सिर्फ चेतन मन (conscious mind) को पता था। और आपका अवचेतन मन इस सब से बिल्कुल अनजान था। और फिर जब आप ने प्लान follow करना चाहा, अवचेतन मन ने साथ नहीं दिया और अंततः दिमाग से decide किये गए plan को follow करने का आपका दिल ही नही किया। एक बार फिर दिमाग अपनी बाजी दिल के हाथों गवाँ बैठा।

आप ने न जाने कितनी ही बार ये महसूस किया होगा कि आप सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण कार्य नही कर पाते क्योंकि बस आपका दिल नहीं करता। चाह कर भी आप वो महत्वपूर्ण कार्य को अच्छे तरीके से करने से चूक जाते हैं।

एक शराबी को ये मालूम होता है कि शराब पीने से न सिर्फ उसके शरीर का नाश हो रहा होता है बल्कि पारिवारिक स्थितियां भी खराब होती चली जाती है। और वो ये भी जानता है कि उसे इस लत से बाहर निकलना जरूरी है। वो इस के लिए उपाय भी अपनाता है। मगर फिर भी शाम 7 बजते ही न जाने क्या हो जाता है कि उसका दिल उसके दिमाग की बात ही नही सुनता और फिर उसी काम को कर बैठता है जो उसका दिमाग नही चाहता है। और इस प्रकार एक दिमाग फिर से एक अहम बाजी अपने ही दिल के हाथों हार जाता है।

यही बात आप के जीवन के हर कोने पर लागू होती है। आपको मालूम होता है आपको क्या करना चाहिए और कैसे करना चाहिए मगर न जाने क्यों ये दिल ही नही मानता और आपकी लुटिया डुबो ही देता है।

बस यही सब कुछ प्रत्युषा के साथ भी हुआ। बेहद intelligent और सफल होने के बावजूद break up के बाद उसे अपना जीवन व्यर्थ नजर आने लगा। और ये सब इसलिए हुआ कि उसका दिमाग उसके दिल को सही राह नही दिखा पाया। प्रत्युषा के द्वारा चेतना से (दिमाग से) किये सारे efforts उसे इस इस हालत से बाहर नही निकाल पाए। रिश्ता टूटने के बाद प्रत्युषा अपनी feelings को काबू ही नही कर पाई।

feelings अवचेतन मन की ताकत होती है। ये निश्चित था कि जीत अवचेतन मन यानी दिल की ही होनी थी। उस की feelings आहत थी। तीव्र दर्द feelings में भरा पड़ा था। दिल (अवचेतन मन) ये नही जानता है कि सही और गलत क्या होता है। अगर आप इसे कोई रास्ता न दिखा पाएं तो ये अपना रास्ता खुद-ब-खुद चुन लेता हैं। दिल वही रास्ता चुनता है तो दर्द से दूर जाता हो। प्रत्युषा के दिल ने दर्द से दूर जाने का रास्ता अपनाया। उस समय उस के दिल के लिए सबसे अहम था दर्द से दूर जाना। उसका दिमाग उस के दिल को दर्द से निपटने का कोई रास्ता न दिखा पाया। दिल को उस दर्द से छुटकारा पाने के रास्ता आत्महत्या में ही दिखा।

और दिमाग को एक बार फिर मात देते हुए प्रत्युषा के दिल ने उसे आत्महत्या तक पहुचा दिया। और वो इस काम में बहुत अच्छी तरह सफल भी रहा।

यही कारण है जो काम आप सिर्फ बुद्धि बल से करने की कोशिश करते हैं उसमे आप अक्सर असफल हो जातें हैं। जब तक किसी भी काम से आप भावनात्मक तरीकें से न जुड़ें हो उसके सफल होने के chances न के बराबर होते हैं।

यही कारण है कि तीव्र बुद्धि वाले लोग भी अक्सर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में असफल हो जातें है। वो ये ये कभी समझ ही नही पातें है कि किसी भी लक्ष्य को भावनात्मक जुड़ाव के बिना पूरा करना बहुत मुश्किल है।

यही कारण है कि आप उस नौकरी में अच्छा प्रदर्शन नही कर पातें हैं जिसे आप पसंद न करते हों और जिसे आप enjoy न करते हों। यही कारण है कि अक्सर वो रिश्ते ज्यादा देर नही चलते जिनमे feelings और emotions की कमी हो।

यही कारण है कि आप उन बुरी आदतों को नही छोड़ पातें है या नई और अच्छी आदतों को नहीं अपना पातें हैं। यही कारण है कि आप गुस्से को काबू नहीं कर पातें हैं। यही कारण है कि आप वो सब कुछ नहीं कर पाते हैं जो आप अक्सर करना चाहते हैं।

इसी तरीके से आपकी जिंदगी आपके आपे से बाहर होती चली जाती है। बहुत बार आप ने महसूस किया होगा कि जिंदगी इसलिए असहज हो गयी क्योंकि भूतकाल में कुछ विकल्प आप सही नहीं चुन पाए।
जीवन बहुत भाग दौड़ और प्रतियोगिता भरी हो गई है। इस भाग दौड़ में आप अपने दिल को जानना और समझना भूल गए हैं। आज आप को जरुर्रत है कि आप अपने दिल को सुनें। दिल ही किसी इंसान का सबसे अच्छा दोस्त होता है। मगर आज तक आप इस दोस्त को समझ नहीं पाए। इस दोस्त की ताकत को भी नही समझ पाए।

इसे समझें, इसे जाने। दिल (subconscious mind) दिव्य होता है। इसका संबंध सीधा अलौकिक शक्तियों से भी माना जाता है। आप को अपने दिल और दिमाग के बीच एक तालमेल बैठाने के जरुर्रत है।

जरुर्रत है कुछ ऐसा करने की कि आपका दिल आपके दिमाग की बात समझे और दिमाग दिल को समझे।
यकीन मानिये जीवन स्वर्ग तभी बन पाएगा जब आप का दिल और दिमाग एक हो पायेगा।

अपने दिल की आवाज को सुनिए। ये भगवान या प्रकृति का दिया एक महत्वपूर्ण guidance system है जिसमे आपके जीवन को निर्देशित करने की सम्पूर्ण शक्ति मौजूद है। एक सफ़क्त और सुखी जीवन जीने का राज आपके दिल और दिमाग के अच्छे तालमेल से जुड़ा होता है। आपका दिल कभी भी झूठ और गलत निर्देश नहीं देता है। न जाने कैसे मगर विश्व के सफलतम लोगों को ये बात बहुत अच्छी तरह मालूम भी थी और वो इसे अपनाते भी थे।

विकल्प जीत का (winning choice):

हर समय, हर जगह और हमेशा ही आप के पास दो विकल्प होते हैं:-

    • एक तो है कि आप अपना जीवन बस ये सोच कर बिता दें कि आखिर आप का जीवन आप के वश में क्यों नहीं है
      और दूसरा की अपने जीवन को इच्छा अनुसार plan औऱ design करें और फिर इस plan को अपने ही दिल में भेज कर वो जीवन जीयें जो आप जीना चाहते हैं।

    पहले विकल्प को चुनने के लिए आपको बस इतना करना है कि जीवन जैसा चल रहा है उसे चलते रहने दें और झेलते रहें।

    जबकि दूसरे विकल्प को चुनने के लिए आपको बहुत तकलीफ उठानी पड़ेगी और हो सकता है वो सब करना पड़े जो आप ने आज तक न किया हो। दूसरे विकल्प के लिए आप को मेहनत करनी पड़ेगी अपने दिल को समझने की। मेहनत करने पड़ेगी सारे tools और techniques सीखने की जो आप के comfort zone को समाप्त कर सकते हैं।

    हालांकि ये सब बहुत ही आसान है और मेरी आने वाली पोस्ट में मैं ये सब आप के साथ share भी करूँगा। बस आप इस blog का साथ न छोड़ें। इसे समय-समय पर visit करते रहें और पढ़ते रहें। इसकी updates सीधा अपने mail से पाने के लिए subscribe भी कर सकते हैं। या फिर हमें justhappyminds@gmail.com पर अपना संदेश भेजें।

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    Picture Sources (except our originals): internet


    Manoj Sharma

    Writer, Trainer and Motivator

    9 Comments

    Balasaheb Zore · December 11, 2017 at 8:38 am

    Really nice. Amazing information !

    Dr prem chand · November 2, 2017 at 10:25 pm

    All human being needs to understand the Importance of the subconscious mind. great book

    Param randhawa · October 16, 2017 at 10:21 pm

    Hello sir ….bilkul sahi hai ..dil ki sune …meri badi se badi life ki problems dil ki sunne ki vajeh se hi solve hui hai…it’s 101% true …aur sabse acchi baat god ki tAraf se hi gift hai mujhe agar koi mujhse jhooth ya phir cheat krta hai mera dil hi bata deta hai sab ..nice post sir

    kiran · October 8, 2017 at 12:17 pm

    Nice

    Naveen Sharma · October 8, 2017 at 8:44 am

    Very impreesive thoughts, it will really help me in my life

    प्रीतम सिंह · October 8, 2017 at 8:31 am

    सर् अच्छा लगा। मगर आपकी ब्लॉग को सब्सक्राइब करने की ऑप्शन नही दिख रही। फिर सब्सक्राइब कैसे कर सजता हूँ।

      Manoj Sharma · October 8, 2017 at 9:01 am

      प्रीतम जी, “COMMENT” बटन के नीचे एक ऑप्शन आती है जहाँ लिखा रहता है कि “Notify me about new posts”. आप अपना email id लिखने के बाद इसे √ कर दें।

    Anonymous · October 8, 2017 at 8:28 am

    Great, wonderful. .

    Jyoti Sharma · October 8, 2017 at 8:13 am

    Bahut badhiya.. Kripya ye bhi bataiye ki dil Aur dimag ke beech talmel kaise bna sakte hain

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